आग अधिकारी है
जलाकर राख करें
तमसो मा ज्योतिर्गमय हो
नैनो को तृप्त करें
सूरज में है आग
जगत का पोषण करें
जो हो ना हो आदित्य
तो जीवन कैसे पार करें
आग ही थी खोज
पाषाण युग जो न्यूज़ भरे
मानव समाज विकास
आग पाषाण से दूर करें
आग से ही भोजन
स्वादु बना करे
जो ना हो ऊष्मा ऊर्जा
हुआ अचरज करें
आग ऊर्जा का रूप स्वरूप
सदा बदला करे
न की जा सके पैदा
ना यह नष्ट हुआ करें
आग जो मन में लगे
कार्य पूर्ण हुआ करें
मन की भावना को
सुस्त सदा किया करें
आग है अद्भुत पुंज
दर्शन से भी हरे
किरण को नष्ट करे
तो शरीर भी भस्म करें
तो मानो तो ईश्वर
ना मानो तो तृष्णा
आग तो आग है
नमन सदा ही करना
आग अग्नि महातेज
दाहक तत्व से भरे
पाचक तत्व की धाती
जठराग्नि से पोषण करें
आग शीत की प्राणवायु
गर्म बनाए जीवित करें
प्रकाश पैदा करें
अंधकार भी नष्ट करें
रक्त वर्ण आग ऐसे
सुधा भी शांत करें
अग्नि तत्व के गुण को
उषा से निंद्रा आलस्य हरे
पावक पावन और पवित्र
धर्म पालन करें
अवधूत औघड़ जान
प्रणाम नित्य करें
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