Gentleman: Who, Why, Where!

जेंटलमैन –
जा के फटे ना पैर बिवाई-


(यदि आप सज्जन है या नहीं है या होना चाहते हैं या सज्जन को जानना चाहते हैं तो यह आलेख आपके लिए है)
सद + जन यानी सच से परिपूर्ण व्यक्ति ही जेंटलमैन या सज्जन के रूप में परिभाषित होता है. कदाचित कलयुग की अंधी दौड़ में जेंटलमैन दुर्लभ प्रजाति हो क्योंकि दूसरे को धक्का देखकर या प्रतियोगी की रेखा को छोटी कर आगे बढ़ाना इस दौर की स्थापित प्रवृत्ति है.


सड़क पर लाल बत्ती पर रुकना हो या घायल बीमार की सड़क पर या अस्पताल में सहायता या देश के कर का निष्ठा पूर्वक भुगतान हो, एक विचित्र मानसिक अवस्था से जेंटलमैन दायित्वों का निर्वहन पूर्ण शुद्धता से करते चलते हैं. सज्जन होना भी एक जीवन शैली है जो दुरूह व कष्टकर हो परंतु तंत्र, समाज और देश की अनमोल धरोहर होती है. भले संख्या न्यून हो परंतु जेंटलमैन की छाप व्यवसाय, सेवा, उत्पादन और घरेलू मोर्चे पर सभी जगह एक जैसी प्रदर्शित होती है. जेंटलमैन एक भला पति और पिता होने के साथ-साथ भला नागरिक भी अपने आप को सिद्ध करता है जो अपने उत्तरदायित्व को परिवार की लंबाई और चौड़ाई में निभाते तो है ही, अपने सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और आध्यात्मिक सरोकारों से भी धनात्मक व सृजनात्मक रोल प्ले की भूमिका प्रस्तुत करता चलता है.


पौरुष, शरीर सौष्ठव मात्र का ही प्रतीक नहीं है बल्कि निर्जन में सृजन, आपदा में सहायता को सदैव आतुर हो ऐसा व्यक्ति ही जेंटलमैन की श्रेणी में हो सक्रिय योगदान देता है. न्याय के प्राकृतिक नियमों से संस्कृत जेंटलमैन जीवन के हर दौर और प्रत्येक दुर्गम सुगम परिस्थितियों में हेल्पिंग हैंड बढ़ाने को तत्पर होते हैं. साधारण भाषा में कहें तो मन-जीते और हरिप्रिय सम्मानीय होते हैं सज्जन जो ईश्वरत्व की लौ जलाए रखते हैं और सज्जनता, अच्छाई, न्याय और समानता का प्रचार करते चलते हैं.


समाज में भले यह जेंटलमैन डरपोक या भीरू और भय- ग्रस्त की छवि से चिन्हित होते हो परंतु यह दुर्लभ प्रजाति धैर्य, संयम और अनुशासन का समुचित मिश्रण होते हैं जो क्रोध, बैर, घृणा और लोभ की स्थापित बुराइयों से अनिवार्य दूरी बनाए रखते हुए अपने जीवन मूल्यों को उच्च स्तर पर बनाए रखते हैं.
भले ही आम व्यक्ति, मूल्यवान कपड़ों एवं उच्च स्तर की स्वच्छता, हाई-फाई बातों और हाई-एन्ड वाहनों से कुलीन दिखाने का प्रयास करें, उसकी सज्जनता तो कर्म का गहना है जो सदकर्म से ही प्रकाशित होने को प्रस्तुत होती है.


कुलीन, धनी, ज्ञानी, विद्वान, कलाकार और अन्य भी सज्जन तत्व की छवि प्राप्त करने को सेल्फी- सहायता, सेल्फी -दान, सेल्फी- घोषणा जैसे उपागम का सहारा लेकर प्रयासरत रहते हैं परंतु नागरिक, सज्जन व्यक्ति की पहचान आसानी से कर लेते हैं चाहे वह दरिद्रता के आवरण में ही क्यों ना हो.

तुलसीदास, कबीर, बुद्ध, महावीर, पतंजलि जैसे विप्र गण, विद्वान होने के साथ-साथ सज्जन होने की उच्च श्रेणी के वाहक रहे जिन्होंने हर परिस्थिति में सहायता का हाथ आगे होकर दिया. सज्जन व्यक्ति सजग होकर जीवन के रास्ते में साक्षी भव से रस और रास बढ़ाते चलते हैं जो अर्जुन के कथन अनुसार दृष्टमेव स्वजनम के पालक होते हैं.


सच हो कदाचित कि सज्जन, ईश्वर से अधिक संवेदना पर विश्वास कर पालन करते हैं और संवेदना और मम – वेदना के सुधि पुरोधा यह जेंटलमैन सूर्य की भांति बिना असफल हुए प्रतिदिन अपनी धनात्मक ऊर्जा का प्रसारण और वितरण करते चलते हैं.

ज्ञान, भक्ति, कर्म के मार्गों पर चल कर मोक्ष हासिल हो ऐसे सज्जन विचार से ऊपर हो वह डिपो भाव ने अपना बुद्ध स्वयं बनो की विचारधारा के हरक़रा होते हैं सज्जन आदित्य कोई भी चिकित्सक अपने सभी रोगियों की प्राण रक्षा नहीं कर पता है परंतु वह किस प्रकार अपने रोगियों एवं उसके परिजनों के जीवन को होने से स्पर्श कर पूर्ण प्रयास करता है वह उसे जेंटलमैन डॉक्टर बनता है और और की वासना युक्त दौड़ में सज्जनत्व और नहीं कहानी हो मृत्यु लोक में अपना जीवन में साकार कर ही लेता है.


जेन्टलमैनशिप की स्केल पर आप कहां खड़े होते हैं- इन प्रश्नों के अटर पर आपकी हां को एक अंक दीजिए ना को शून्य


कर्मशील है – हां/ ना


सीखने को आतुर हैं – हां/ ना


भावुक एवं संवेदनशील हैं- हां /ना


सत्यवान और कर्तव्य निष्ठ है -हां /ना


आत्मा-अभिमानी -हां/ ना

सरल मानस – हां/ना

प्राकृतिक न्याय के हामी- हां /ना


सदा सहाय- हां /ना

अनुशासनबद्ध व कानून पालक- हां /ना


नियमित करदाता -हाँ /ना

Always a Giver

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