किसी भी खेल प्रेमी के लिए इससे बड़ी कोई 56 भोग दावत नहीं हो सकती जिसमें आठवें और नवे नंबर के बल्लेबाज 202 रन की भागीदारी निभाकर एक कठिन फंसे हुए मैच को जीता कर ले जाएं, वैसे ही जैसे भेड़िए के झुंड से शेर अपना शिकार निकाल कर ले जाए.
आज आस्ट्रेलिया तथा अफगानिस्तान के मैच में अफगानिस्तान के 291 रन के समक्ष ऑस्ट्रेलिया के 7 विकट का नुकसान मात्र 91 रन पर हो गया. इस समय अपने नाम को चरितार्थ करते हुए मैक्सवेल और कप्तान कंमिस ने एक ऐसी साझेदारी अंकित की जो हाल ऑफ फेम में रखी जाने योग्य है जहां मैक्सवेल ने न केवल अपना दोहरा शतक पूर्ण किया बल्कि घायल हो कर भी खड़े-खड़े याने बिना फुटवर्क के प्रयोग के खेलने की ऐसी परिभाषा गठित की कि जिसे शब्दों में बयां कर पाना आसान नहीं है.
यह शारीरिक क्षमता का खेल नहीं था यह शुद्ध मानसिक क्षमता और टाईमिंग का खेल था जिसमें मैक्सवेल ने मैदान के चारों ओर चौके और छक्कों की वह कॉपी बुक स्टाइल और अनऑर्थौडोक्स शोट्स की वह बौछार की की जिसे देखकर क्या कहते हैं, वह दिल बाग बाग हो गया.
इस मैच को देखकर भारत-पाकिस्तान के T20 मैच की याद आ गई जिसमें विराट कोहली के सामने आठ गेंद में 28 रन बनाने का लक्ष्य था जो उन्होंने सफलतापूर्वक प्राप्त कराया या युवराज सिंह ने 2007 में वर्ल्ड कप में छह बॉल में छह छक्के मारे थे या कपिलदेव के 83 विश्व कप में 175 की धुँआधार पारी वाली वह अनुभूति इस मैच में आज हुई.
सच्चे खेल प्रेमी के लिए यह मैच एक अद्भुत दावत था और खेल भावना के चलते इस मैच को इस पूरे टूर्नामेंट का सबसे बेहतरीन मैच माना जा सकता है
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