Minerals You Need.

प्रमुख खनिज तत्व जो हमारे शरीर की गतिविधियों के लिए आवश्यक होते हैं वह 6 हैं कैल्शियम, क्लोरीन, मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटेशियम तथा सोडियम.

दूसरी ओर जिन खनिज तत्वों की अल्प याने लेश- मात्रा में आवश्यकता होती है वह 7 है क्रोमियम, कॉपर, क्लोरीन, आयोडीन, आयरन, सेलेनियम तथा जिंक.

यह सभी प्रमुख तथा लेश मात्र खनिज तत्व हमारे मानव शरीर के विभिन्न तंत्रो को सुचारू चालन के लिए आवश्यक ही नहीं अनिवार्य होते हैं और उनकी कमी होने पर शरीर की व्यवस्था बिगड़ती है.

भारत अपनी खनिज संपदा के लिए विशेष रूप से समृद्ध है और यही खनिज, हमारे भोजन तत्वों में भी सम्मिलित होते हैं
मानव को आवश्यक प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट तथा फैट के साथ-साथ विटामिन और खनिज तत्वों की भी आवश्यकता होती है

जैसे कैल्शियम की कमी होने पर हड्डियां भंगुर हो जाती हैं और रक्त में कैल्शियम की अधिकता होने पर मस्तिष्क और किडनी पर विपरीत प्रभाव पड़ता है
क्लोरीन की कमी होने पर एसिड – बेस बैलेंस बिगड़ा है
वही मैग्नीशियम की कमी होने पर कमजोरी, चक्कर, ऐंठन और मिर्गी जैसे रोग होने की संभावना होती है

फास्फोरस की कमी होने पर भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और आसानी से फ्रैक्चर हो सकता है वहीं रक्त के आरबीसी व डब्लूबीसी कोशिका की शक्ति में भी कमी नोट की जाती है
पोटेशियम जैसे प्रमुख तत्व की कमी होने पर कमजोरी के साथ-साथ भूख न लगना, हृदय की गति की लयबद्ध न होना, भूख न लगना जैसी स्थितियां बनती हैं और इस कमी से मृत्यु तक हो सकती है.
वहीं सोडियम की कमी होने पर मांसपेशियों में ऐंठन, कमजोरी, भूख का अभाव जैसी स्थिति तो बनती ही है सोडियम की अधिकता रक्त में होने पर रक्तचाप में वृद्धि तथा हृदय पर अधिक भार बढ़ाने की स्थिति बनती है.

यह सभी तत्व हमारे दैनिक भोजन में सम्मिलित दूध/ दही/ पनीर /मक्खन /अण्डा/ किशमिश/ खजूर/ नमक /हरी पत्तेदार सब्जियां /अनाज/ मुर्गा/ गोश्त /केला/ मौसमी/ तरबूज में आसानी से एवं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो जाते हैं

अल्प मात्रा में लगने वाले खनिज तत्व अनिवार्य रूप से आवश्यक होते हैं जितना प्रमुख खनिज तत्व. क्रोमियम जैसे अल्पांश खनिज तत्व से शरीर में इंसुलिन का निर्माण होता है और इसकी कमी होने पर रक्त शर्करा उच्च हो जाती है और मधुमेह का रोग हो सकता है
कॉपर जैसे तत्व की कमी पर एनीमिया होने की संभावना रहती है जबकि अति हो जाए तो लीवर, नेत्र और मस्तिष्क में तांबे का जमा हो सकता है.
इस प्रकार एक अन्य हैलोजन तत्व फ्लौरिन दांतों एवं हड्डियों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक है जिसकी कमी होने पर दांतों का क्षरण होने लगता है क्लोरीन की अति होने पर दांतों पर दाग होते हैं
एक अन्य हैलोजन तत्व आयोडीन, नमक में शासन द्वारा मिलकर दिए जाने से पूर्ति आसानी से हो जाती है. आयोडीन की कमी होने पर बच्चों में गोइटर जैसे रोग होने की संभावना होती है मस्तिष्क विकास भी मंद पड़ जाता है इस तत्व की अधिकता होने पर भी थायराइड ग्रंथि के कार्य प्रणाली में परेशानी आती है

भारतीय, पुरुषों महिलाओं दोनों के लिए आयरन का तत्व बहुत महत्वपूर्ण है. इसकी कमी होने पर एनीमिया, कमजोरी तथा कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता हो जाना देखा जाता है. इसी आयरन की अधिकता होने पर लिवर तथा की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है
एक अन्य अल्प मात्रा में अनिवार्य खनिज तत्व है सेलेनियम जिसकी कमी होने पर पेशियां में दर्द, हृदय की मांसपेशियों की ताकत में कमी हो जाती है
एक अन्य जिंक नामक तत्व की कमी होने पर शारीरिक वृद्धि मन्द हो विकास में कमी होने लगती है तथा जख्म भरने में भी समय लगता है. जिंक तत्व की कमी से त्वचा का सूखापन या एक्जिमा जैसी बीमारियां भी हो जाती है वही जिंक की अधिकता होने पर अतिसार जैसे रोग होने की संभावना होती है

ये ट्रेस एलिमेंट्स, प्रमुख रूप से दाल /अनाज/ दलिया/ वनस्पति तेल/ मांस/ पानी /चाय /समुद्री मछलियों /आयोडीन नमक/ हरी पत्तेदार सब्जियां/ अनाज /जीरा/ अजवाइन /धनिया /गुड/ अंडा / मटर /लोबिया/ चावल तथा राजमा में उपलब्ध होते हैं जिनके सेवन से इन तत्वों की कमी को दूर किया जा सकता है. आवश्यकता इस बात की है कि आपका भोजन, सभी मौसमी सब्जियां, मौसमी फलों तथा अनाज के सभी संभव तत्वों के साथ-साथ डेयरी उत्पादों का भी समावेश होना चाहिए ताकि किसी प्रमुख खनिज तत्व अथवा लेश मात्र में आवश्यक खनिज तत्व की कमी न होने पाए.

😃🇮🇳

Macro & Micro

Walk to say, Bye to Obesity

Rule of 80 & Be Healthy!

Advertising in Health Sector : Unhealthy Trend.

Leave a comment

Blog at WordPress.com.

Up ↑