SriLanka : Awesome Tourist place

जीवन को यदि यात्रा का नाम दें तो किसी स्थान विशेष की जीवंत यात्रा भी जीवन से कम नहीं है।

…यात्री हो तो प्रकृति का दर्शन प्रेम विकसित हो ही जाता है और ऐसे यात्री पहाड़ों, जंगलों और नदी – समुद्र से अनजाने में प्रेम विकसित कर लेते हैं। यदि आप थोड़ा सा ध्यान दें तो आप महसूस करेंगे कि हमारे पूर्वज अतिज्ञानी थे। प्रकृति की विशालता और अनुकूलता की अनुभूति प्रत्येक मानस को हो, इस हेतु धार्मिक स्थलों को पवित्रता का ताना-बाना पहना कर भारत को भिन्न-भिन्न मतावलंबियों के लिए धार्मिक स्थल स्थापित कर दिए। हिमालय की तराईयों में बौद्ध स्तूप, शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंग, दैवीशक्ति के 52 शक्तिपीठ, पवित्र चार धाम, गणेश जी के अष्टविनायक, बुद्ध की मोनेस्ट्री, पवित्र नदी-पहाड़ और पर्वतों जैसे बहुमूल्य नगों से अलोकित कर दिया है।

भारतीय उपमहाद्वीप में श्रीलंका का भी ऐसा ही विशिष्ट स्थान है जो प्रकृति की संपदा से सुंदरतम रूप में आलोकित है। समुद्र से चारों ओर से घिरा होने के बाद भी इस देश की हरियाली अप्रतिम रूप से सुंदर है । बुद्ध की ऋचाओं का प्रसार करते समय साधकों ने बुद्ध के दांत का मंदिर, बुद्ध की कंधे की हड्डी का स्तूप जैसे धार्मिक स्थान सदियों पहले स्थापित कर दिए थे। साथ-साथ राजा कश्यप जैसे पिताहंता पुत्र का विश्व धरोहर में सम्मिलित 200 मीटर ऊंचे पहाड़ पर 1800 वर्ष पूर्व बना किला समस्त यात्रियों के लिए श्रीलंका में पर्यटन का विशेष आकर्षण है। श्रीलंका के दक्षिण में समुद्र की यात्रा विशेष रूप से सराहनीय प्रयास होता है जब आप खुले समुद्र में चारों ओर स्तनपायी विशाल मछलियों का प्राकृतिक दर्शन करने का अनुभव महसूस करते हैं । आम भारतीयों के लिए श्रीलंका की यात्रा का मुख्य आकर्षण अशोक वाटिका है यह वाटिका मंदिर सीता-एलिया गांव में स्थित है जो नुवेरेलिया जिले का हिस्सा है यह सीता वाटिका एक पर्वती झरने के किनारे हैं । किवदंती है कि रावण ने सीता मां को इसी स्थान पर कैद करके रखा था हालांकि ऐसी दंत कथाएं भी प्रचलित हैं कि रावण, सीता मां को एक स्थान से दूसरे स्थान पर निरंतर हस्तांतरित करता रहता था और यह स्थान रावण के महल से आज के लगभग 100 किलोमीटर दूर था जहां से रावण अपने पुष्पक विमान से आता जाता था । सत्य है या मात्र लोककथा कहना मुश्किल है किंतु इस स्थान पर धार्मिक आस्था बलवती हो जाती है और इसी मंदिर परिसर में हनुमान जी के पांव का एक निशान भी प्रदर्शित होता है जो अति विशाल है जो संभवत उस काल में मानव के बहुत बड़े आकार के होने का एहसास कराता है ।

बौद्ध मतावलंबियों के लिए श्रीलंका, पावन तीर्थ है जहां बुद्ध की शिक्षाएं पल्लवित हुई हैं लगभग 2000 वर्षों से श्रीलंकाई भगवान बुद्ध की रचनाओं को पोषित करता रहा है । देश के उत्तर में अनुराधापुरा, पुरातन राजधानी है जहां बुद्ध के ज्ञान की संगत के परिसर और रेलिंग के भग्नावशेष समयातीत धरोहर का परिचय कराते हैं । स्टोन रेलिंग की रचना लगभग 1900 वर्ष पुरानी होने के बावजूद भी आधुनिक काल की रेलिंग से बराबर का मुकाबला करती हैं। हालांकि रेलिंग के अंदर स्थित परिसर का मूल उद्देश्य क्या है आज तक समझा नहीं जा सका है। यह रेलिंग ओर स्तूप विश्व धरोहर हैं और समुचित रूप से संरक्षित हैं। ऐसी रेलिंग भोपाल के समीप स्थित सांची स्तूप में भी प्रदर्शित हैं। अनादिकाल से अनुराधापुरा के इस स्थल पर बौद्ध मतावलंबी खुले आसमान के नीचे ध्यान लगाते थे। जैतवारा में स्थित स्तूप राजा महासेना द्वारा तीसरी सदी में बनाये गए थे। लगभग 75 मीटर ऊंचे ये स्तूप इतने विशाल हैं कि नजदीक से देखने में नेत्रों में समाते नहीं है।

यहीं एक परिसर में 2300 वर्ष पूर्व उसी पुराने बोधि वृक्ष को रोपा गया था जिसके नीचे बैठ बुद्ध को कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यह वही वृक्ष का हिस्सा है जो भारत के बोधगया में स्थित है। यहां बुध की चार मूर्तियां चार दिशाओं में एक वर्ग के आकार में स्थापित की गई थी जो जीवन के विभिन्न कालो को प्रदर्शित करते हैं । हालांकि अब केवल भग्नावशेष हैं और वह महाबोधि वृक्ष भी शेष नहीं है किंतु स्थान की पवित्रता एक धनात्मक अनुभूति देती है ।

दाम्बुला के स्वर्ण गुफा मंदिर-
बुद्ध के साधकों और शिष्यों ने दांबुला में गुफा मंदिर बनाए हैं जो लगभग 2200 वर्ष पूर्व के हैं और विश्व धरोहर हैं . यह दांबुला के स्वर्ण मंदिर 150 मीटर ऊंचे पर्वत को काटकर गुफा में भव्य मंदिर बमाये गए है जो आज भी हमारी संतति को चमत्कृत करने के लिए सक्षम है। भूतल से 160 मीटर ऊपर स्थित यह बुद्ध मंदिर 400 सीडी चढ़कर इन प्रथम सदी की गुफा मंदिर तक पहुंचा जाता है आश्चर्य की बात यह है कि सीढ़ी मार्ग भी उतना ही प्राचीन है और मशीनी युग के आने के पहले बने इन मार्गों और मूर्तियों और मूर्ति की रचना क्षेत्र न केवल आश्चर्यचकित कर देते हैं बल्कि भारत में स्थित अजंता के चित्रों की भांति बुध, बोधिसत्व, विष्णु भी प्रदर्शित करते हैं। गुफा मंदिरों में मोक्ष की अवस्था में लेटे हुए बुद्ध की विशालकाय अर्वाचीन मूर्तियां हैं जो जीवन के उद्देश्यों के प्रति संदेश देती हैं लेकिन मानव मन तो चंचल है तभी यहां के एक गुफा मंदिर में 2000 वर्ष से पहले के रखे हुए जवाहर और गहने मात्र 20 वर्ष पूर्व एक साधक द्वारा चुरा लिए गए जिसका आज तक पता भी न चला । इन्हीं पर्वत मंदिरों की एक गुफा में लेटी हुई बुध की मूर्ति के साथ 56 शिष्यों की मूर्तियां भी हैं जिससे पता लगता है कि जन्म-मृत्यु, धन-यश, लोभ-मोह जैसे विकारों में डूबे रहने के बाद भी सुधिमन अपनी जीवन यात्रा के भ्रम की सच्चाई को जानने का प्रयास करते रहे हैं। अनादि काल से ही आश्चर्यजनक रूप से गुफा के बीच में पर्वत गुफा की छत से पानी की बूंदें टपकती हैं जिन्हें पवित्र पानी समझा जाता है और इस पानी को लेटे हुए बुद्ध की मूर्ति को दिन में तीन बार अर्पित किया जाता है। यह पानी कहां से आता है आज तक किसी को भी पता नहीं है। इन्ही गुफाओं की दीवारों पर हर्बल रंगों से चित्रों उकेरे गए हैं जो लगभग 2100 वर्षों से अपना सजीव रंग बरकरार रखे हुए हैं जो आश्चर्यजनक लगता है और यह चित्र नयनाभिराम भी है। इस बुद्धिस्ट मॉनेस्ट्री के मूल स्वरूप को बचाए रखने में श्रीलंका शासन के प्रयास सराहनीय है इसी दांबुला क्षेत्र में ही बुध के स्तूप में बुध की कंधे की अस्थि रखी गई है जो धर्मावलंबियों के आकर्षण का केंद्र है।

सत्ता मदांध है और उसका नशा मदहोश कर देता है ऐसा ही एक राजा चौथी शताब्दी में हुआ जिसमें राज्य प्राप्त करने के लिए अपने ही पिता की हत्या कर दी। कश्यप नाम के इस राजा जो दासी पुत्र था और ज्येष्ठ था किंतु संदेह होते ही कि सत्ता, रानी के बेटे को चली जाएगी उसने अनुराधापुरा की राजा याने अपने पिता की ही की हत्या कर दी और राजधानी बदलकर सिगरिया में स्थापित की जो अनुराधापुरा से उत्तर-पूर्व में स्थित है। लगभग 200 मीटर ऊंची पहाड़ पर बना यह किला विश्व की संरक्षित धरोहर है। राजा कश्यप ने अपने 22 वर्षों के शासनकाल में अपनी सुरक्षा के लिए लगभग अभेद दुर्ग का निर्माण किया जिसके चारों ओर दो पानी की दो नहरे बनवाई ताकि दुश्मन किले पर चढ़ाई करने के पहले गहरी नहर पर करें। ऊंचाई पर सैनिकों की निगरानी के लिए पर्वत में ही खोह बनयाई थी। राजा कश्यप की अनेकों रानियों के लिए कई स्विमिंग पूल और पानी के फव्वारे जो राज पथ के दोनों और स्थित है और बिना बिजली के यह फव्वारे आज भी चलते हैं बशर्ते किले के ऊपरी भाग में पानी के स्त्रोत जैसे ताल तलैया पानी से भरे हो। इस भव्य किले में एक मिरर-वाल स्थित है जो कालांतर में आए यात्रियों की टिप्पणियां समेटे हुए हैं जो 6 से 14 वीं शताब्दी के मध्य लिखे गए हैं इसी स्थान पर नग्न चित्र भी उकेरे गए हैं जो रंगीन और आकर्षक हैं लेकिन इन चित्रों को फोटो लेने की अनुमति नहीं है । सिगरिया के इस किले को देखना उस काल के समाज के मानस को समझने में बड़ा सहायक है जो सीमित संसाधनों के होते हुए भी एक ऐसा किला बना देते हैं जिसका रूप रंग बाघ जैसा दिखाई पड़ता है जिसके द्वार पर सिंह के पंजों की विशाल आकृति उकेरी गई है जो आपको अपनी सुंदरता से वशीभूत कर लेती है।

कैंडी एक बड़ा शहर है श्रीलंका में और पवित्र शहर है जहां बुद्ध का एक दांत पवित्र मंदिर में रखा गया है जो जिसके दर्शन प्रत्येक 10 वर्ष में एक बार सभी लोगों को होते हैं मंदिर भव्य है और पूजा अर्चना कुछ-कुछ हिंदू रीति और बौद्ध शैली में होती है। इस मंदिर में बुध के इस पवित्र दांत की यात्रा का विस्मयकारी वर्णन चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है कि किस प्रकार राजाओं के अहम लोग और दांत की पवित्रता के रास्ते अपनी सत्ता बनी रहे जैसे कारणों से आपस में झड़ते उलझते रहे। कुछ भी हो मंदिर की पवित्रता स्थापित है और जापान चीन और भारत थाईलैंड के बौद्ध भिक्षु एवं धर्मावलंबी इस पवित्र मंदिर के दर्शन करने बड़ी संख्या में उपस्थित होते हैं

श्रीलंका के दक्षिण भाग में भारतीय महासागर में मोटर बोट का बिहार एक रोमांचक अनुभव है जो समुद्री जीवो से आपके फ्रीहोल्ड दर्शन करा देता है आमतौर पर कछुए और व्हेल मछली आसानी से दिख जाते हैं और आप भाग्यशाली हुए तो 5 घंटे के समंदर भ्रमण में डॉल्फिन भी लिख सकती है इस भ्रमण में नए अनुभव होते हैं जो समुद्री यात्रा के मोशन सिकनेस जैसे हैं जीवन में एक बार इस तरह के अनुभव किए जाना चाहिए हालांकि यह यात्रा $50 प्रति व्यक्ति के हिसाब से महंगा सौदा है फिर भी एक बार के लिए यह ठीक ही है। श्रीलंका भारतीय मूल के तमिल और सिंहली लोगों का देश है फिर भी लोगों के रहन-सहन आवास विकास में सिंगापुर ऑस्ट्रेलिया की छवि दिखती है कोलंबो के आसपास एक्सप्रेस सिक्स लाइन हाईवे है परंतु पूरे देश में डबल रोड का जाल बिछा है क्योंकि लोग अनुशासित हैं और सड़क पर ट्रैफिक नियमों का पालन करते हैं तो सड़कों पर लॉक जाम नहीं लगते हैं सड़क रेल लाइन की क्रॉसिंग पर भी लोग अपने वाहनों पर इस प्रकार रुके रहते हैं जैसे कि हम अपने देश में ऐसे अनुशासित दृश्य कम ही देख पाते हैं 8 दिनों की लंबी श्रीलंका यात्रा में मैंने दो बार ही हां की आवाज सुनी जबकि सड़कों पर ज़ेबरा क्रॉसिंग खड़े दिखते ही वाहन चालक स्वयं अपना गतिमान वाहन रोक देते थे जो मेरे लिए आश्चर्य से कम न था।

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