Ralamandal

विलक्षण संपदा…

कहने को तो चढ़ाई की दूरी मात्र 2.5 किलोमीटर है,
है भी वह स्थान इंदौर नगर के आगोश में,

ऊंचाई भी समुद्र से मात्र 782 मीटर है,

वन विभाग का एकमात्र अभ्यारण्य है जो बारिश के मौसम में भी खुला रहता है

चढ़ने चलें तो थोड़ी ट्रेड- मिल पर चलने के जैसी अनुभूति करवा देता है,

ईश्वर को पाने के कई मार्ग की भांति ही इस भू-संपदा के शीर्ष पर पहुंचने के कई कच्चे पक्के मार्ग हैं,

कहने को इतनी आसान है चढ़ाई कि हिमालय की ट्रैकिंग को जाने वाले इसको चुनौती देने चले आते हैं,

कोशिश करें तो इस 2.5 किलोमीटर की चढ़ाई को 80 बरस के बुजुर्ग भी धीरे धीरे चढ़ जाते हैं

और युवा तो दौड़ते हुए चढ़ जाते हैं जो यदा कदा 80 मिनट में 3 बार चढ़ने उतरने की चुनौती लेते हैं,

कभी कभी इस छोटी यात्रा में नील गाय, चीतल, सेही, मोर मोरनी, अजगर के दुर्लभ दर्शन के साथ अदभुत पक्षी भी दृष्टिगोचर हो जाते हैं,

और जंगल का सौंदर्य तो सभी मौसम में अपने आप को 56 भोग की तरह जैसे परोस ही देता है,

क्या हरी घास, क्या फूलों से आच्छादित झाड़ियां, वृक्ष , बबूल, नीम, सागौन, हरश्रिंगार, मीठा- नीम के लहलहाते वृक्ष बरबस अपनी छटा से मन मोह लेते हैं यदि उस दृष्टि के आप वाहक हों,

इस मौसम में हारश्रिंगार के मार्ग में गिरे पुष्प जैसे आप जैसे संत मन के स्वागत मे बिछे पड़े प्रतीत होते हैं

दृष्टि, दृश्य और द्रष्टा के साक्षात्कार करने के लिए इस संपदा की आपकी यात्रा प्रातः 6.30 आरम्भ की जाए तो चिड़ियों के अरण्य कलरव के साथ साथ ठंडी हवाओं का मृदुल स्पर्श आपको हर्षित किये बिना नहीं छोड़ेगा,

और जब नेपथ्य में देवाधिदेव सर्वशक्तिमान आदित्यनाथ अपनी पीतवर्णा लालिमा ले आपके दर्शनों को उपस्थित होते हैं तो हृदय कृतज्ञ भाव से भर उठता है तथा आपके कर-कमल बरबस नमन को जुड़ जाते हैं,

ॐ मित्राय नमः…

और जब पक्के मार्ग से आप इस छोटी पहाड़ी के आरंभ बिंदु पर यात्रा का श्री गणेश करते हैं तो मार्ग के दोनों ओर स्थित पेड़ों की श्रृंखला आपके स्वागत में एक आर्च बना कर प्रस्तुत होती है,

तो निश्चित ही आप आश्चर्य चकित हो जाते हैं.

जी हां, यहां चर्चा हो रही है, इंदौर के जी. पी. ओ. से 15 किलोमीटर दूर स्थित रालामंडल शिकारगाह की जो होलकर काल से अभ्यारण्य है और जिसकी नैसर्गिक संपदा रविवार की सुबह अनेकानेक प्रकृति-प्रेमियों को अपने अंक में भर लेती है …आल्हादित कर देती है अपनी ऊर्जा से, बाहुपाश से, शुद्धतम प्राणवायु से और अपने अप्रतिम सौंदर्य से…

पहाड़ी के शीर्ष पर बहती बयार आपके पसीने को सोखने के साथ नई ऊर्जा से भरने को ऑक्सिजन का दुगुनी खुराक देती है और सुस्ताने की आपकी शारीरिक इच्छा से आत्म- ध्यान भी प्राप्त हो जाता है.
प्रकृति से जुड़ाव ही समाज को हरा भरा करेगा, सनद रहे…

(वन विभाग द्वारा अशक्त जनों के लिए बैटरी कार की सुविधा भी उपलब्ध कराई है तथा एक अल्पाहार केंद्र भी संचालित है)

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