अलाव
भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए गांव में रहना और सर्दियों के दिनों में एक घेरा बनाकर एक-एक कर कई ईंट की बैठक पर पुठ्ठे टिकाकर, गाँव वासियों का लकड़ी का अलाव जलाकर सर्दी को भगाने का बड़ा आम प्रचलन है इसमें बच्चे बड़े बूढ़े सब एक साथ सम्मिलित होते थे और उस अलाव की संगोष्ठी में बुजुर्गों के द्वारा ऐतिहासिक और पौराणिक किस्से तो साझा किये ही जाते थे बल्कि लोगों के संबंध में भलाई एयर बुराई की भी बड़ी चर्चाएं होती थी और यह अलाव सर्दी के दिनों में उस देसी जमाने का एक प्रकार से सोशल मीडिया का हैंडल हुआ करता था. इस अलाव ने अंग्रेजों के आने के बाद एक नया स्वरूप लिया और कुलीन वर्ग की बड़ी संगोष्ठियों में पार्टी में कैंप फ़ायर के रूप में स्थापित हुआ और आम तौर पर फ़ायर पिट भी कहा जाने लगा है.
वस्तुओं की दुनिया के मशहूर विक्रेता वॉलमार्ट के एक आउटलेट में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जहां पर प्रदर्शित एक उत्पाद के चित्र को आपसे साझा करने का लोग संवरण नहीं कर पाया हूं
आप ध्यान से देखें सुरक्षा के लिए एक लोहे की जाली बनाई हुई है, ईंटों का आधार बनाया गया है और लकड़ी बीच में रखी गई है और आधुनिक अलाव बनय गया है. विशेषध्यान-आकर्षण का बिन्दु है, कीमत , जिसकी ओर भी ध्यान दिया जाना अनिवार्य होगा.
बिकता सब कुछ है बेचने वाला चाहिए

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