Walk to say, Bye to Obesity

90 दिन, 90 मिनट पैदल जो चलते, मोटापे को करते नमस्ते….

समाज की बड़ी शारीरिक समस्याओं में से निश्चित रूप से बच्चों में, स्त्री-पुरुष या बड़े-बूढ़ों में समान रूप से मोटापे की बीमारी उपस्थित है. इस मोटापे के लिए हमारी जीवनशैली सबसे बड़ा दोषी है जो बच्चों के खेलने के समय में कमी और भोजन के आधुनिक फास्ट फूड जैसी लत ने मोटापे को हर घर में स्थान दे दिया है. मोटापा एक भीषण रोग पूर्व अवस्था है जो शरीर को कमजोर बना देता है और उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कोलेस्ट्रोल आधिक्य, थायराइड की बीमारी और कैंसर जैसी लाइलाज बीमारियों को शरीर में पनपने का मौका दे देता है. बच्चों में भी अब मोटापा एक स्थाई प्रवृत्ति बनता जा रहा है जो निश्चित रूप से हमारे अतिशय लाड-प्यार के साथ साथ मैदान में खेलने के घंटों में आई कमी के कारण भी है. मोटापे को कम करने के लिए आवश्यक है कि आप शरीर के कार्य करने की कार्य प्रणाली को समझने का प्रयास करें जहां हम शरीर के ऊर्जा व्यय याने कैलोरी के खर्च करने के नियम तंत्र को समझने का प्रयास करेंगे

शरीर की फिजियोलॉजी, शरीर के कार्य तंत्र को समझने का विज्ञान है.शरीर की ऊर्जा के स्त्रोत हैं ए.टी.पी. जो मांसपेशियों में उपस्थित होते हैं और उनके साथ रक्त में बहने वाली शक्कर भी है. इसके अतिरिक्त लीवर में संचित शर्करा है ग्लाइकोजन जो बैंक में रखी जमा पूंजी की भांति होता है. ऊर्जा का अंतिम स्रोत है वसा या फैट जो शरीर के विभिन्न हिस्सों में लॉकर में रखे जेवर की भांति संचित होता है. यह एटीपी, रक्त प्रवाहित शर्करा, लिवर ग्लाइकोजन तथा बॉडी फैट ही ऊर्जा के तुरन्त तथा दूरगामी स्त्रोत है.

जब भोजन ग्रहण किया जाता है तब उसमें उपस्थित शर्करा या कार्बोहाइड्रेट रक्त में उचित स्तर तक होकर प्रवाहित होती है इसके पश्चात अधिक मात्रा में भोजन से प्राप्त कार्बोहाइड्रेट रक्त में प्रवाहित होकर लीवर में ग्लाइकोजन के रूप में एकत्र हो जाती है. इससे भी अधिक मात्रा की रक्त में बहती शर्करा सामान्य स्थिति में वसा के रूप में एकत्र हो जाती है.

प्रश्न यह उठता है कि इस फैट को कैसे जलाया जाए. जब हम पैदल चलना या दौड़ना या कोई भी कार्य करना आरंभ करते हैं तब मांसपेशियों में उपलब्ध ऊर्जा का स्त्रोत याने ए टी पी खर्च होना आरंभ होता है जो 2 से 5 मिनट में समाप्त हो जाता है. इस कालखंड के बाद आपका शारीरिक श्रम यदि जारी रहता है तो रक्त में प्रवाहित शर्करा खर्च होना आरंभ होती है जो आपके लगातार कार्य के अपने किए जाने पर लगभग 20 से 25 मिनट में समाप्त होने लगती है. यहीं पर लीवर को संकेत मिलता है, शरीर के रक्त के ग्लूकोज के स्तर में कमी हो रही है. लगभग 30 मिनट के शारीरिक श्रम के कालखंड के बाद, ग्लूकोज का स्टोर याने ग्लाइकोजन, टूटकर रक्त में ग्लूकोज के रूप में प्रवाहित होना आरंभ होता है. यह लीवर में संधारित ग्लाइकोजन, बैंक के एटीएम की भांति अगले 20 – 25 मिनट तक आप को उर्जा प्रदान करने में सक्षम है. इस 40 – 50 मिनट के शारीरिक श्रम पश्चात ही शरीर के लॉकर में जेवर की भांति संचित सोना है याने फैट निकलना आरंभ होता है जो ऊर्जा के स्त्रोत में काम करने में काम आता है.
और इसी समय हम अपने व्यायाम में शारीरिक श्रम को विराम देते हैं जब फैट का गलना शुरू ही होता है. आप ध्यान करें कि लंबी दूरी के धावक मैराथन जो दौड़ते हैं एकदम दुबले-पतले होते हैं क्योंकि वह अपनी ऊर्जा का सारे स्त्रोत जैसे एटीपी, रक्त शर्करा, लीवर ग्लाइकोजन के साथ-साथ विसरल फैट भी जला चुके होते हैं. 3 घंटे तक लगातार बिना रुके बिना थके श्रम करने में उनका संचित फैट, कपूर की भांति उड़ जाता है. प्रश्न यह उठता है कि 90 दिन में 90 मिनट प्रतिदिन शारीरिक श्रम लगातार किया जाए तो क्या आपके शरीर में जमा फैट गलने लगेगा और 90 दिनों में आपका शरीर आकार सुधर जाएगा…तो इसका उत्तर है जी हां…90 मिनिट के प्रतिदिन लगातार श्रम से रक्त में बहने वाली शक्कर कम हो जाएगी और मधुमेह बेहतर रूप से नियंत्रित होगा. पसीना बहाने से लवण का उत्सर्जन होगा और इससे आपका रक्त चाप सामान्य स्तर पर आ जायेगा.
तो याद रहे कि 90 मिनट के लगातार किए जाने के बाद आपका शरीर एक निश्चित टोन याने शारिरिक सुदृढ़ता में आ जाएगा क्योंकि आपने अपने लॉकर में संचित जवाहरात राशि जैसा फैट खर्च करना शुरू किया है. यहां 90 मिनट व्यायाम करने से तात्पर्य इसलिए है कि 45 मिनट तक जब आप का व्यायाम करने से लीवर ग्लाइकोजन समाप्त हो जाएगा तब ही आपका फैट, बीटा ऑक्सीडेशन की चयापचय घटना के द्वारा शुरू होगा. इसलिए 45 मिनट के बाद अतिरिक्त 45 मिनट का शारीरिक श्रम आपको करने से स्वाभाविक रूप से फैट को जलाने में लाभ मिलेगा

याद रहे कि 90 मिनट के श्रम के लगातार किए जाने के बाद नाश्ता भोजन में शक्कर के भोज्य पदार्थों का समावेश ना करें जैसे पोहा जलेबी आलू चावल मिठाई इत्यादि 90 मिनट की मेहनत जाया ना होने दें और प्रतिदिन के 90 मिनट के व्यायाम से आपके जीवन भर के लिए एक नई ऊर्जा प्राप्त होगी. ऐसे समय पर जब व्यायाम करके आप घर पहुंचे तब लो-कैलोरी भोजन का सेवन करना चाहिए. 90 मिनट के शारीरिक श्रम के लिए कतई आवश्यक नहीं कि आप लगातार धीमी दौड़ या मध्यम गति की दौड़ करें. साधारण रूप से आप पैदल भी चलते रहे तो 90 मिनट में आप पसीने से तरबतर होंगे जो मोटे लोग पैदल चल सकने में असमर्थ हैं, वे 90 मिनट लगातार साइकिल चला सकते हैं या स्विमिंग पूल में लगातार तैर सकते हैं.

जिम में व्यायाम करने की सलाह नहीं दी जाती है जो शरीर से स्वस्थ है तो वे सब फिटनेस के उच्च स्तर को प्राप्त करने के लिए जिम किया करते है. बाजार में उपलब्ध और बहु प्रचारित प्रोटीन के सेवन की भी सलाह नहीं दी जाती है जो आपको नई बीमारियों के चंगुल में फंसा सकते

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