Movie Review: TNHP

तुमसे ना हो पाएगा,

बड़ा सुना हुआ सा और अपना सा यह वाक्य लगता है तुमसे ना हो पाएगा

आज 2 अक्टूबर छुट्टी के दिन एक अनुपम अनुभव हुआ जब स्टार्टअप की एक कहानी तुमसे ना हो पाएगा का चित्र दर्शन हुआ.
आमतौर पर यूनिकॉर्न की बड़ी-बड़ी बातें की जाती है लेकिन स्टार्टअप को धरातल पर लाने और उसे आसमान की ऊंचाई तक पहुंचाने में होने वाली मानसिक, आर्थिक तथा भावनात्मक समस्याओं
का अद्भुत चित्रण देखने को मिला. चित्र सजीव है और प्रेरणास्पद भी मुख्यत: उन जवान बच्चों के लिए जो सरकारी नौकरी में अपना भविष्य ना खोजते हुए एक चैलेंज अपने आप को देना चाहते हैं, सफल होते हैं असफल होते हैं… परंतु लगे रहते हैं, जुटे रहते हैं और जीवन उन्हें पुन: सफलता की ओर ले जाता है जो इस सामान्य सिद्धांत को सिद्ध करता है किसी भी व्यवसाय में या नए व्यवसाय में 1000 दिन तो देना ही पड़ते हैं और यदि आप व्यवसाय के जहरीले और जानलेवा उतार-चढ़ाव को झेल जाते हैं तो ईश्वर को भी आपकी सहायता करने को उपस्थित होना पड़ता है. भाई जैसे दोस्त, गौरव और शरद व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जाते हैं परंतु कठिन समय में दोनों अलग होते हैं और फिर एकजुट हो हार्वर्ड यूनिवर्सिटी तक की कहानी बनते हैं. चलचित्र मूलतः कॉमेडी, ड्रामा, ड्रामेडी, ब्रोमांस के साथ-साथ
मोहब्बत का भी तड़का लगाती है परंतु जो सबसे अच्छी बात लगी वह यह थी कि घर की मां को इस चलचित्र की कहानी में धुरी बनाया गया है और एक स्वप्न प्रस्तुत किया गया है कि घर का खाना कितना पसंद आता है और वह व्यवसाय का एक पूर्ण भी बन सकता है. चित्र, वरुण अग्रवाल की पुस्तक हाउ आई ब्रेव्ड अनु आंटी एन्ड कोफाउंडेड मिलियन डॉलर कंपनी पर आधारित है जो वस्तुत आपको नेल बाइट फिनिश करने में जरुर मदद करती है. एक अच्छा अनुभव है जो चलचित्र दर्शन को बांधे रखने में सफल भी है और दोबारा देखने के लिए भी रुचि कायम रखता है. यह चलचित्र नए बच्चों को जरुर देखना चाहिए. भाषा अवश्य कहीं कहीं असंयत होती है जो दाल चावल घी के योग में कंकर जैसी चुभती भी है

Overall its a good experience to watch as theme, faces, act, direction all are palatable.

Enjoy….

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