Discipline at its best!

पुलिस की उपस्थिति नगण्य, परंतु भय अनंत…

… व्यक्ति का चरित्र तब परीक्षा पर होता है जब कोई देख ना रहा हो.

कदाचित अनुशासन इसे ही कहते हैं, जब स्वयंहित हेतु एक नियमबद्ध दैनिक कार्य पद्धति का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए. जब यह नियमबद्ध दैनिक कार्य- पद्धति समाज व देशहित में हो जाए तो स्वयं नियंत्रण की सेल्फ-पोलिसिंग का अनिवार्य घटक बन सकती है. कहने को तो अमेरिका दुनिया का प्रथम रैंक का देश है चाहे वह टेलीफोन के कोड में हो या दुनिया में चौधराहट जताने में, नागरिकों की जीवन शैली में भी उच्च स्तर का अनुशासन भी प्रथम स्तर पर आत्मासात साथ किया हुआ प्रदर्शित होता है. अमेरिका के सड़क परिवहन में उच्च गुणवत्ता एवं उच्च ब्रांड के वाहनों की तीव्र गति पर भी अनुशासन की पराकाष्ठा का प्रदर्शन हर पल दिखाई देता है. अमेरिका में इस अनुशासन को देखकर बरबस सेल्फ – पुलिसिंग का भाव समझ में आता है. सड़क मार्ग पर फ्री -वे अथवा एक्सप्रेस-वे या कॉलोनी या छोटे गांव की गलीनुमा सड़कों पर भी ट्रैफिक संकेतकों का प्रभावी प्रदर्शन दिखता है बल्कि नागरिकों द्वारा प्रभावी पालन भी अनुशासन के उच्च स्तर को दिखाता है.

सडकों पर सबसे अधिक दिखने वाला संकेतक है, रुकने के लिये लाल रंग का एक स्टॉप का संकेतक 🛑 हर गली सड़क के मुहाने या क्रॉसिंग पर सेल्फ पॉलिशिंग का अद्भुत उदाहरण सिद्ध होता है. यहां अनायास ही वाहन चालक के ब्रेक पर पैर लग जाते हैं चाहे ट्रैफिक शून्य हो अथवा अंधेरी रात हो, दोनों ओर देखकर कि कोई वाहन तो नहीं आ रहा है या पैदल यात्री या साइकिल चालक न हो तभी वाहन आगे बढ़ेगा. रक्त वर्णीय षट-कोणीय स्टॉप साइन 🛑 के दर्शन मात्र से वाहन रुक जाते हैं. जैसे पैरों की मांसपेशियां एक याददाश्त लेकर चलती हों कि स्टॉप साइन दिखा कि मसल-मेमोरी से वाहन से ब्रेक लगा. वाहन के पूर्णत: रोकने के बाद ही एक्सीलेटर पर फिर पैर का दबाव पड़ेगा.

और तो और यह सब बिना किसी सी.सी.टी.वी. या पुलिस जवान की उपस्थित से भी पालन किया जा रहा है, याने स्वयं-नियंत्रण. सेल्फ पॉलिशिंग का यह दृश्य देख दुनिया के अग्रणी देश के समक्ष एक भारतीय नतमस्तक हो सकता है. जहां स्टॉप साइन अमेरिका के सड़क परिवहन का सबसे खास सुरक्षा का चिन्ह है जो अनावश्यक दुर्घटनाओं से प्रभावी बचाव करता है वह भी बिना पुलिस की भौतिक उपस्थित की व्यवस्था के.
भारतीयों के लिये भरत में अविश्वसनीय को कदाचित परंतु असम्भव तो कतई नहीं है.

दूसरा अनिवार्य ट्रेफिक सिग्नल है, स्पीड साइन बोर्ड –
प्रत्येक सड़क पर कार या ट्रक के पृथक पृथक चलने की गति सीमा अंकों में अंकित है जैसे 30. कॉलोनी की छोटी गली में 15 मील प्रति घन्टा की गति तो नगर की सड़क पर 30 तो एक्सप्रेस-वे पर 55 तो फ्री-वे पर 70 मील प्रति घन्टा. इस संकेतक के दिखते ही वाहन चालक अपनी गति संकेतक अनुसार गति नियंत्रित कर लेते हैं भले ही पुलिस की उपस्थिति नगण्य हो परंतु नागरिकों के मन में पुलिस का भय अनंत है या यूं कहें कि तंत्र के प्रति सम्मान है तो और उचित होगा. और यही है अमेरिका का सेल्फ पुलिसिंग का सुविचार का पाठ जिसे यहां का नागरिक या आदिवासी भारतीय भी हर्ष से नियमबद्ध होते हुए पालन करते चलते है.

अमेरिका के ट्रेफिक का तीसरा मुख्य अवयव है लेन-कल्चर अर्थात वाहन को अपनी लेन में ही चलने का अद्भुत अनुशासन, चाहे वह दो लाइन को दो तरफा सड़क हो अथवा 8 लेन की एक तरफ यानी 16 लेन
की सड़क की रचना जो अमेरिका के बड़े शहरों जैसे लॉस एंजेलिस, शिकागो या न्यूयॉर्क में है जहां 55 से 70 मील प्रति घंटा की वाहन गति, विधि-सम्मत होने के साथ-साथ लगभग दुर्घटना रोधी है. यहां सड़क पर रुकना बाधित है या सड़क किनारे रुकने की 2 घंटे की समय सीमा यदा कदा किसी किसी सड़क पर दिखाई पड़ती है. लेन के अनुपालन हेतु सड़क पर प्रतिशत प्रदर्शित पीली पट्टियां और खम्बों पर हवा में प्रदर्शित दिशा सूचक के माध्यम से कन्वेयर बेल्ट की भांति वाहनों को सही दिशा में इंगित करते जाते हैं और वहां अपनी लेने बदलते हुए अपने गंतव्य तक सड़क की लेन चुनते हुए पहुंचते जाते हैं. यह किसी जादू से कम प्रतीत नहीं होता है कि लेन बदलते समय वाहन के इंडिकेटर दिए जाने के समुचित समय पर ही लेन में
परिवर्तन किया जाये. समस्त गणना का तंत्र इन्च, फुट और मील आधारित ही है तो 70 मिल की गति भी 112 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो जाती है और फ्री वे में तो 100 मील प्रति घंटा की गति भी मानो कम प्रतीत होती है.
इस पूर्ण ट्रेफिक तंत्र में स्वचालित वाहनों का भी योगदान है जो आगे चलते वाहन से ऑटो-क्रूज कर देने पर स्वचालित वाहन अनिवार्य दूरी बनाए रखते हुए सड़क की स्थापित 55 या 70 मील प्रति घंटा की गति बनाए रखते हैं. यह आश्चर्यजनक है कि एक सामान्य भारतीय के लिए जो सेल्फ पुलिसिंग का प्रदर्शन अमेरिका में निवासरत आम नागरिकों में देखा है वह तो बस चमत्कृत ही हो जाता है. हालांकि यह सही है कि यहां कारों के अतिरिक्त दो पहिया वाहनों का परिचालन शून्य के बराबर है और बिना कार के अमेरिका में दैनिक जीवन की स्वतंत्र कल्पना भी नहीं की जा सकती है. स्त्री, पुरुष, 18 वर्ष से बड़े बच्चे सभी पूरी तरह कर अपनी गतिविधियों के लिए कार पर ही निर्भर हैं.

चौथा है जीपीएस –
वाहन में रोड एटलस की उपस्थिति अनिवार्य होती थी कभी जिसका स्थान अब जियोस्टेशनरी. पोजिशनिंग. सिस्टम. के ऑनलाइन तंत्र ने ले लिया है इसके बिना संभवत नए व्यक्ति या नए क्षेत्र में वाहन चालन तो लगभग संभव ही है. इस जीपीएस के माध्यम से न केवल भीड भरे के रास्तों में लगने वाले समय का अंदाज लग जाता है बल्कि आपके चलने वाली सड़क की निर्धारित गति सीमा भी प्रदर्शित होती है और लेन निर्धारण भी जीपीएस के ऑनलाइन स्क्रीन पर निरंतर प्रदर्शित होता रहता है जिससे 16 लेने की सड़क अथवा लेवल क्रॉसिंग पर किस पुल की किस लाइन में जाने के निर्णय का निर्धारण भी जीपीएस द्वारा ही आसानी से हो जाता है.

पुलिस की तंत्र व्यवस्था इतनी सुदृढ़ रूप से गठित है कि स्कूलों के शिक्षण समय पर पुलिस की एक गाड़ी एक जवान के साथ सदैव उपस्थिति रहती है जो स्कूल के बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीर स्तर को प्रदर्शित करती है. सड़क पर वाहनों के प्रभावी गति नियंत्रण पर निगाहें बनाए रखने के लिए स्पीडगन के साथ सड़क किनारे अथवा पेड़ के झुरमुट या गली के कोने में छुपी पुलिस वाहन के द्वारा निगरानी की जाती है और यदि कार या ट्रक द्वारा गतिसीमा के विरुद्ध तेज गति से उल्लंघन किया जाए तो पुलिस की गाड़ी के रडार पर प्रदर्शित हो जाती है और यदि समुचित कारण ना हो तो लाइसेंस पर प्रश्न खड़ा हो जाता है और अमेरिका में बिना ड्राइविंग लाइसेंस के जीवन दूभर है.

स्नैकिंग एक चमत्कृत करने वाला अनुभव सड़क पर हुआ, जब एक पुलिस मैन सांप की चाल पर सड़क में चल रही थी कदाचित किसी घटनाक्रम के चलते परंतु स्नैकिंग करती पुलिस वैन के पीछे कारों का हुजूम धीमी गति से चल रहा था जो इस पुलिस वाहन से आगे नहीं निकल सकता है और यह पुलिस वाहन राजा की भांति प्रजा रूपी वाहनों को नियंत्रित कर रहा था.

ध्यानाकर्षण इस बात का है कि पुलिस के जवान सब जगह नहीं रह सकते हैं परंतु पुलिस का भय हर व्यक्ति में उपस्थित होकर अनुशासन का पालन करवा सकता है. भारत का भी प्रत्येक नागरिक सेल्फ पोलिसिंग का प्रण ले तो समाज का प्रजातंत्र बेहतर कार्य करेगा और बुरी घटनाएं कम होगी, अस्पताल में एक्सीडेंट के रोगी कम होंगे, न्यायालय में रोड-रेज और रोड एक्सीडेंट के केस कम होंगे और पुलिस एवं न्यायालय अपने लंबित केस शीघ्रता से निपटा सकेंगे. स्वयं नियंत्रण या रामकथा में उद्घोषित लक्ष्मण रेखा का पाठ हर भारतीय नागरिक को अनुशासन का पाठ हो सकता है जो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली अनगिनत सामयीक मौतों से देश को बचा सकता है. जब भारतीय चांद्र्यान चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के साथ साथ अपने चलने में सतह पर मार्ग में आये घातक गड्डे से अपने आप को बचा सकता है तो फिर हम लोकतांत्रिक देश के सुधि नागरिक क्यों नहीं सड़क पर अनुशासित परिचालन के लिए पुलिस की उपस्थिति को सेल्फ पुलिसिंग से लाभान्वित हो.

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