आओ बच्चे धूल मिट्टी में भी खेलें ….
आईआईटी, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट में एडमिशन या मिस वर्ल्ड बनने की इच्छा, कलेक्टरी की या विदेश में जाकर रहने जैसी कालजई आकांक्षा के चलते, समाज में आती संतति…. मशीन की भांति विकसित हो रही है. आज 7 या 8 वर्ष का होते होते बच्चे या बच्ची का लौह पथ निर्धारित हो जाता है कि तुम्हें मिस इंडिया बनना है या फिर सुंदर पिचाई ….दौड़ शुरू और मस्तिष्क के ग्रे मैटर में परिष्कृत घी, मक्खन, पनीर भरना शुरू .
भारत तो ठीक है कुछ अन्य देशों में तो और भी भयावह स्थिति है जहां बच्चे सुसाइड बॉम्बर बनाए जा रहे हैं ताकि मस्तिष्क अपने प्राकृतिक स्वरूप में विकसित ना होने पाए । बचा कुचा कमाल टीवी और सोशल मीडिया या मोबाइल में आसानी से उपलब्ध हर तरह के साहित्य और चलचित्र ने कर दिया है। परिणाम स्वरूप मानसिक शारीरिक विकास अब अधोगामी हो गया है ।
आज भी मजदूर के जो बच्चे धूल मिट्टी में रहते खेलते हैं , भवन में स्वच्छ वातावरण में रहने वाले बच्चों की तुलना में बेहतर रोग मारक क्षमता के धनी होते हैं । मानव शरीर का मूलभूत स्वभाव है प्राकृतिक रूप से स्वस्थ होना साधारण सर्दी जुखाम से लेकर हड्डी टूटने तक का उपचार शरीर रोग के होने के तुरंत बाद प्रारंभ कर देता है समझने की आवश्यकता है कि पुष्प की भांति बच्चे को भी पुष्प पल्लवित या कुसुमित होने दिया जाए आखिर होगा कैसे यह सब??
बिंदु क्रमांक 1
पढ़ाई अनिवार्य है तो खेलना भी अनिवार्य है
अर्थात जो मैदान में खेल आ जाए बच्चों के समग्र विकास में सक्रिय सहायता करता है शारीरिक विकास के साथ-साथ खिलाड़ी मजबूती से मुकाबला करना खेल में दिमाग का प्रयोग करना जीत की भावना लेकर खेलना हार को खेल भावना से स्वीकार करना और चोट को भी खेल का हिस्सा समझना जैसे तत्वों को अंगीकार करना सीख जाते हैं एक अनिवार्य उत्साह खेल में खिलाड़ी की अनमोल धरोहर होती है और आप के खिलाड़ी बच्चे आपसी संबंध बनाने लड़ाई करने या लड़ाई से बचने के हुनर भी अनजाने में सीख जाते हैं अच्छे खिलाड़ी बच्चे बड़े होकर खेल भावना का बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं तथा अवसाद जैसे मानसिक रोगों से बचे रहते हैं फील्ड गेम खेलने का शौक तथा फिटनेस का लगता है तो वह ताउम्र जारी रहता है जो बच्चे के बचपन में सीखी गई की धरोहर है
बिंदु क्रमांक 2
स्वच्छता अनिवार्य है
लेकिन मिट्टी में छोटे बच्चों का खेलना भी एक प्रकार का सब क्लीनिकल संक्रमण (रोग उत्पन्न करने योग्य संक्रमण से कमजोर संक्रमण) से आक्रमण करा देता है और शरीर की इम्युनिटी याने रोग के विरुद्ध लड़ने वाली प्रतिरोधक क्षमता और विकसित हो जाती है मिट्टी में खेलने के बाद हाथ पैर की माकूल सफाई से स्वच्छता का पाठ भी बच्चे सीख जाते हैं और बच्चे को मैदानी खेल खेल का प्रयोगात्मक आनंद भी प्राप्त हो जाता है
बिंदु क्रमांक 3
हैंड आई कोऑर्डिनेशन का विकास-
मैदानी खेलों का अद्भुत आयाम यह है कि अपने शरीर के अंगों को पहचानना होता है . अंगों की रेंज ऑफ़ मोशन का अंदाज विकसित करना होता है जिससे गेंद – बेट, रैकेट – बॉल, शटल कॉक या देसी खेल जिसे सितोलिया, पकड़म पाटी जैसे देशी खेलों से भी शारीरिक क्षमता की सीमा और हैंड आई कोऑर्डिनेशन का विकास होता है . मोबाइल और टीवी के रूप में एक बच्चे का स्क्रीन टाइम बढ़ा है तो फील्ड गेम का टाइम बढ़ाना भी माता-पिता और समाज का उत्तरदायित्व है
बिंदु क्रमांक 4
रिफ्लेक्स का विकास
उसैन बोल्ट जो दुनिया की सबसे तेज 100 मीटर के धावक हैं को रेस में बंदूक की गोली की आवाज सुनने के दशमलव .15 सेकंड के भीतर ही अपने मस्तिष्क से आदेश प्रसारित करने का तीव्र रिफ्लेक्स प्राप्त हो जाता है जिससे जांघों की मांसपेशियां शरीर को आगे धकेल देती हैं जब तक प्रतिद्वंदी खिलाड़ी अपना पहला कदम आगे बढ़ाते हैं उसेन बोल्ट 2 मीटर आगे हो जाते हैं यह रिफ्लेक्स फील बच्चे फील्ड में दौड़ते हैं, खेलते हैं, गिरते हैं, हारते हैं ,जीतते हैं तो शारीरिक मानसिक और भावनात्मक विकसित होते हैं और आप अपने बच्चे को मशीनी मानव बनने से बचा लेते हैं
बिंदु क्रमांक 5
मित्रता
एक पूरा जीवन लग जाता है मानव स्वभाव को समझने में और अच्छा मित्र पहचानने में खेल के मैदान से भी अच्छे मित्र बनाए जा सकते हैं जो आपको नैतिक बल के साथ-साथ खेल के आवश्यक नियम कौशल और जीत हार की भावना से कैसे लड़ना है इसका परिचय कराते हैं अच्छा खिलाड़ी अच्छी दोस्ती कहानी होता है और अच्छा मानव बनता है वह बच्चे को फील्ड में खेलने दीजिए जहां उसकी शारीरिक चोट के साथ साथ साथ ही की पहचान करने की अघोषित ट्रेनिंग होती है और अभ्यास से जड़मति होत सुजान के दोहे के अनुसार एक बच्चे का समग्र शारीरिक मानसिक भावनात्मक और संभवत आध्यात्मिक विकास भी होता है एक बात ध्यान रखें मोबाइल का दर्पण दिखाओ कम प्रकृति का दर्शन हरदम और इसी सिद्धांत पर हमारी आने वाली संतति बच्चे समाज का समग्र स्वास्थ्यवर्धक विकास सुनिश्चित होगा

Rule of 80 & Be Healthy!

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