Ideal Man

आदर्श पुरुष हूं मैं

…..आदर्श पुरुष हूं मै.
यह घोषणा है या सूचना !
……यह वक्तव्य है फिर चाहे तुम जो समझो प्रिये.
आप अपने को आदर्श घोषित कर रहे हो ?
……हां यही समझ लो .
रविवार की दोपहर गुनगुनी धुप में बैठे पति पत्नी का संवाद चल रहा है जिसमें पति गीता ज्ञान नामक पुस्तक पढ़ते पढ़ते ये संवाद कर बैठे है. वहीँ दूसरी और अखरोट के छिलके तोडती अर्धांगिनी अपने कर्त्तव्य पालन के साथ एक विशुद्ध विदुषी महिला की भांति अपने प्रिय पति देव से चर्चारत हैं….
यह आत्म श्लाघा है या…..पत्नी बोल ही उठीं.
……नहीं सच्चाई है ……पति भी आत्मतुष्टि की तलवार लिए पूर्ण स्वयम-निष्ठां से किला पकडे हैं.
कैसे ….
…..तुमसे बेहतर कोई नहीं जानता प्रिये.
मैं !
…..हां ….तुमने मेरे व्यवहार को विवाह के 25 वर्षों में सबसे नजदीक से देखा है
तो आपको मुझसे प्रमाण पत्र होना क्या ? पत्नी भी किला लड़ाए है.
…..नहीं तो !
तो क्या ?
….तो यह जब तुम लोग मेरी आदर्शवादीता को नहीं पहचान रहे हो तो मैं तुम्हें जानकर बता रहा हूं
अच्छा बताओ कैसा है आपका आदर्शवाद….खुलासा कीजिये.
….. मैं पूर्ण निष्ठा से अपने कर्म व्यवहार और वचन से अपने धर्म का नैतिक पालन करता हूं
वह तो सभी पुरुष करते हैं . पत्नी ने आइना दिखाया.
….सभी नहीं !
पर बहुत तो करते हैं. वह तो नहीं कहते कि मैं आदर्श हूं. पत्नी थर्राई.
….तभी तो मैं कह रहा हूं की मैं जाग्रत हूँ , क्योंकि मैं जागृत हो गया हूं मैं अपने कर्म वचन व्यवहार नैतिक आचरण आदि से प्रकृति और समाज के नियत नियमों का पालन कर रहा हूं ……निष्ठा से अपने कर्तव्यों का पालन देश और समाज हित का रक्षण ……परिवार का पालन पोषण……. प्रकृति का संरक्षण और बचाव…… शासन के प्रदत्त नियमों का अनुसरण ……आदाता करों का भुगतान आदि आदि का पूर्ण सत्यता और निष्ठा से पालन करता हूं और इसलिए आदर्श पुरुष कहलाने का हकदार हूं . इती सिद्धं ….किम बोलते तुमि अब!
पति को लगा अब जीत हो गयी है.
अच्छा तो आप मर्यादा पुरुषोत्तम. . . .पत्नी भी हथियार डालने को राजी नहीं है.
……नहीं मर्यादित भारतीय !
अरे सीधे-सीधे राम बनो ना. . . .पत्नी ने रामबाण चला ही दिया अब.
……..अरे नहीं बेमानी है मेरी तुलना राम से क्योंकि राम के बराबर त्याग तो किसी ने नहीं किए उनके जैसा कर्मवीर और वीतराग पालन करने वाला अतिमानव कदाचित ही पृथ्वी पर पैदा हो लेकिन …..मैं आदर्श हूं मानो न मानो. पति महोदय अडंगा-प्रसाद बने हुए है अभी भी.
कैसे ? और खुलासा कीजिएगा पतिदेव.
…….. मैं सेवाभावी हूं और समस्त लोक हित के कार्य मुस्कुराके करता हूं ताकि कोई भी आमजन मुझसे असंतुष्ट होकर ना जाए .
वह तो आप पेशे से डॉक्टर हो करना ही पड़ेगा……. मुस्कुराकर मरीज से मिलना…. धीमे स्वर में बात करना …..सहन करना… शरीर और मानस के रोगों का निदान और उपचार करना ….सहानुभूति पूर्वक व्यवहार करना ……समस्या निवारण करना तो आपका कर्तव्य है करना ही होगा यह तो.
……हां वही तो मैं करता हूं इसीलिए मैं हूं आदर्श पुरुष.
कहीं आप सठिया तो नहीं गए है ये आदर्श आदर्श का जाप.
……अरे भाई आप लोग मुझे पहचानते नहीं मेरे सतकर्मो को यश देते नहीं तो मजबूरन मुझे कहना ही पडा….. मुझे ही उद्घोषणा करना पड़ी सूचना देना पड़ी कि मैं हूँ आदर्श पुरुष.
तो आप प्रशंसा चाहते हो ?
…….हां ….इसमें गलत क्या है हर मानव पहचान का अभिलाषी है और उसे उसका हक मिलना चाहिए
अच्छा…. साड्डा हक एथे रख.
…..जो तुम समझो…… मैं हूं आदर्श!
नहीं आप नहीं .
…….तो तुम मुझे सिद्ध करो कि मैं आदर्श नहीं !
मैं क्यों करूं मुझे क्या पड़ी.
…..आदर्श नहीं तो इससे कम पर कहीं भी स्थापित करो कि आदर्श तो नहीं किंतु आप….
अच्छा तुम्हारी कैटेगरी बताएं अच्छाई की सीढ़ी पर कहां हो !
……ऐसा ऐसा समझ लो
जब विवाह तुमसे हुआ मां बोली …..परमेश्वर है पति तुम्हारा…. शुरू के कुछ महीनों में जानू स्वीट हनी बेबी हो गए तुम, फिर मनु पैदा हुई तो जिम्मेदार भी हुए तुम साथ ही मनु के पापा का नाम दिए गए …परमेश्वर छूट गया फिर शिवी पैदा हुआ ……तुम्हारा नाम सबके लिए पापा ही हो गया…… अब बच्चे बड़े हो गए तो नया ….राग आदर्श आदर्श पुरुष का अलाप रहे हो सुबह से.
……हां वही तो सेवा कर्म और धर्म पालन के मानकों का सीमित दायरे में रखते हुए कोई अन्याय ना करते हुए मैं आदर्शवादी आदर्श कहलाने का पात्र हूं
तो मैं भी हूं आदर्श, जो आपने अभी किये उद्घोष….. आदर्श पुरुषत्व के लिए ……पिछले 25 वर्षों का हिसाब किया….. उसमें मैं भी आपकी बराबर की हिस्सेदार.
….हां सो तो है
तो मैं भी आदर्श स्त्री !
….हां बात तो सही है .
फिर क्या ?
…आदर्श ठीक है …..तू भी.
….मैं और तुम आदर्श
सही !
……और दोनों खिलखिला कर हंस पड़े

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