Alcohol – Bliss or Burden

शराब की सवारी – वर्जना या वरदान

शराब से संबंधित प्रत्येक बात भारतीय समाज में सामाजिक बुराई है …यदा-कदा यह बात कही जाती है कि वैज्ञानिक स्तर पर शराब पीने के लाभ भी हैं जो हृदय रोग से बचाने में कारगर हैं. हो सकता है कि यह सत्य हो परंतु शराब की उपस्थिति शरीर में अनेक रोगों का कारण भी बन सकती है. अभी ध्यान रखने योग्य बात है शराब के सेवन से प्राप्त आनंद की आड़ में सोशल ड्रिंकिंग या मूड रिलैक्स ड्रिंक या भोजन पाचन हेतु आवश्यक और यौन-संबंध हेतु मूड उत्तेजक जैसे टाइटल भी इस मायावी सोमरस या शराब को प्राप्त है.

सच्चाई क्या है, क्या नहीं परंतु शराब का अर्थव्यवस्था में बड़ा विचित्र स्थान है जो सरकार के लिए लाभदायक है परंतु गरीब के लिए हानिकारक है और अब तो शराब का सेवन प्रतिष्ठा का मापक द्रव है.

समाज में जो स्त्रियों व व्यस्क होते बच्चों में भी प्रचलन में यदा-कदा देखा जाता है. प्रश्न यह है कि शराब का असली रुप क्या है? शराब फारसी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है शर+आब याने शर का अर्थ है शैतान आब का अर्थ है पानी।

क्या यह जहर ही है ?
क्या यह संरक्षक अर्थात प्रिजर्वेटिव भी है ?
क्या यह कम खुराक में जादू करती है

…और यह सब समझने की अनिवार्यता है जब शराब के सेवन से शरीर में उत्पन्न दुष्प्रभावों से भारत में प्रतिदिन 15 व्यक्तियों की मौत हो जाती है यानी लगभग 100 मिनट में एक व्यक्ति की मौत शराब के नाम है. शराब के संभावित लाभदायक प्रभाव यहां विशेष रूप से सीमित मात्रा शब्दों का प्रयोग अनिवार्य है. इस शराब सेवन के संभावित लाभदायक प्रभाव दिखा सकती है. सीमित मात्रा प्रत्येक व्यक्ति के लिए भिन्न हो सकती है किंतु इसका यह तात्पर्य कतई नहीं है कि शराब के लाभदायक और हानिकारक प्रभाव पढ़कर कभी न पीने वाले सुधिजन भी इसका सेवन आरंभ कर दें.
लेखक जिम्मेदारी से और आरोपों
से स्वयं को मुक्त करता है।

शराब स्वयं ऐसी ब्रहम आत्मक है जो आर्थिक शारीरिक मानसिक व धार्मिक प्रभाव रखती है या बर्बाद भी करती है और जीवन रक्षक औषधि भी है जो प्रिजर्वेटिव की भांति औषधि और खाद्य उद्योगों का मुख्य तत्व है

शराब सेवन के सरोकारों में दैनिक शराब सेवन तथा सामाजिक शराब सेवन ज्ञानी सोशल रैंकिंग में अंतर समझना अनिवार्य होगा. शराब के सेवन का सबसे बड़ा नुक़सान है कि इसके सेवन की लत लग जाना है और यह पता नहीं पड़ता है.

शराब सेवन में साथ देना जो एक से दो पैग अर्थात कुल 120 मिलीलीटर तक सीमित हो सकती है इसकी आवृत्ति महा में एक बार की दर से साल भर में 10 से 12 बार हो सकती है इसके प्रभाव या लाभ या हानि से परे हैं क्योंकि यह सोशल ड्रिंकिंग, दाग की भांति दाग अच्छे हैं या सोशल ड्रिंकिंग अनिवार्य पार्टी बाजी में बदल जाए और साप्ताहिक रूप से कम समय में एक या दो या अधिक को उद्धृत किया जाने लगे तो यह आपके शराब सेवन की लत में बदलने की तैयारी है

जब शराब की बोतल घर में रखे जाने लगे और भोजन पूर्व प्रतिदिन इसका सेवन आपको अच्छा लगे तो आप शराब के आदी हो चुके हैं तो निश्चित रूप से हानिकारक है हालांकि दैनिक पीने वाले भी अपने उत्तम स्वास्थ्य का दावा करते पाए जाते हैं इसीलिए शराब संबंधी स्वास्थ्यवर्धक या हानि कारक तथा वे धर्म के मूल से व्यक्ति परखो कर अपना भिन्न-भिन्न प्रभाव प्रदर्शित करते हैं

संभावित फायदे हृदय की बीमारियों से संबंधित हो तो वहीं की सीमित मात्रा 100% लाभदायक हो सकता है जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल एनएसडीएल को बढ़ाने में सहायक है

डायबिटीज के रोगियों को शरीर में थक्के बनने की संभावना भी शराब के सेवन से कम हो सकती है

याद रहे शराब का सेवन दुधारी तलवार है , कम मात्रा लाभकारी और अधिक मात्रा हानिकारक है. एक बात और यह है कि शराब को कामोद्दीपक समझा जाता है जैसे द्रव्य में बढ़ोतरी करते हैं जबकि व्यक्ति की क्षमता में कोई प्रभाव नहीं पड़ता है बल्कि उत्तेजना में सफल नहीं रहने के वैज्ञानिक आधार हैं
सर्दी जुकाम में राहत शराब का शरीर में नसों को फैलाने का प्रभाव है जो वेसोडाइलेटेशन कहलाया जाता है कि सीमित मात्रा से शराब की शक्तियों का ब्याज बढ़ जाता है और ऐसी स्थिति में सर्दी खांसी में भी कमी दर्ज की जाती है

मानसिक तनाव में कमी आधुनिक काल की जीवन शैली में तनाव का विशेष स्थान है और तनाव से मुक्त होने का आसान मार्ग है वाहिनीयों के व्यास में अंतर पैदा करने के कारण मस्तिष्क की नसों में रक्त प्रवाह बढ़ता है और मूड एलिवेटर हार्मोन स्रावित होते हैं न्यूरो साइकेट्रिक की संभावना में कमी दर्ज की गई है

स्वस्थ वयस्क में पित्ताशय में पथरी किडनी में पथरी की बीमारी के कम होने के भी अध्ययन है

शराब के नुकसान में सबसे बड़ा नुकसान है इसके नशे की लत लग जाना और जिस कारण आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है

प्रत्येक भोज्य पदार्थ और औषधि का चयापचय शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि लिवर में होता है शराब की लत से अधिक प्रभाव लिवर पर पड़ता है और लिवर के खराब हो जाने के ही प्रमाण उपलब्ध होते हैं जो सीधे-सीधे शराब के कारण होते हैं
शराब के सेवन से ही
हिंसक प्रवृत्ति विकसित होती है
वाहन चलाने में निर्णय गलत होते हैं तो एक्सीडेंट होते हैं नींद पर्याप्त नहीं होती है

मस्तिष्क सही निर्णय न ले पाने में असमर्थ हो जाता है
स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है और आर्थिक हानि होती है जो दैनिक आधार पर परिवार को नष्ट कर देती है

शराब बुराई है तनाव मुक्ति या रिलैक्स होने का बहाना हो सकती है किंतु विनाशक शरीर पर दो धारी तलवार की तरह प्रभार करती है क्योंकि शराब सेवन से मस्ती का भाव आता है अच्छा लगता है तो यह सीमित मात्रा कब लत की मात्रा में परिवर्तित हो जाती है पता नहीं चलता है

अतः मस्तिष्क के बेहतर नियंत्रण पर शराब की सवारी कर सकते हैं ,

शराब को अपने ऊपर सवारी ना करने दें

Rule of 80 & Be Healthy!

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