खेत में भगवन

खेत में भगवन….

खेत को जाते समय एक किसान की ईश्वर से मुलाकात हो गयी. किसान को किसान जैसे ही दिखे भगवन. उसे कतई आश्चर्य न हुआ. वो तो किसान ने भगवन को तब पहचाना जब उसने खेत में बुआई की और कहा कि, प्रभुजी, समय से बारिश दे देना. भगवन ने सुन ली होगी तो बारिश समय पर आ गयी. अब झड़ी लगी बारिश की तो धरा और उसमें बने खेत सब  निहाल हो गए…. नदी, नाले पोखर, पेड़-पौधे, जीव – पक्षी, वानर – किन्नर सब आनंदित. किसान भी खुशीलाल कि अब फसल अच्छी ही होगी. झड़ी लगी रही, बारिश की और सूरज बादलों में छुपे रहे कि किसान ने फिर आव्हान किया कि, हे भगवन, अब बारिश का काम पूर्ण हुआ अब कृपा कर मौसम खोल दीजिये. और खूब धुप खिल आई जैसे भगवन ने सुन ली हो.

तीन महीने होते होते किसान की मुस्कान चौड़ी हो गयी, सो फसल भी तैयार हो गयी. किसान ने फिर गुहार लगायी कि अब साथ को मजदुर मिल जायें तो फसल जल्दी कटे. मजदूरों को भी भगवन, मजदुर जैसे लगे की उन्हें जीवन यापन के लिए काम तो मिला. किसान ने फिर व्यापारी तलाशे कि फसल का अच्छा भाव मिल जाये. भगवन ने वह व्यावस्था भी कर दी. किसान के साल भर के राशन की व्यवस्था, बच्चों के स्कूल की पढाई का खर्चा, माँ – पिता की दवाई, कपडे इत्यादि का खर्चा भी पूरा हो गया.

शाम प्रार्थना में बैठे किसान ने प्रभुजी को धन्य धन्य कहा कि , तू प्रभु, मिटटी में है, बीज में है, मजदूरों में है, व्यापारियों में है, बच्चों में है, माँ- पिता में है. मैं ढूंढ़ता भले रहता हूँ तुम्हे, आप प्रभुजी बिना बताये बारिश के पानी में, सूरज की किरणों में, मिति के ढेलों में,बहती हवा में, पेड़ – पौधों ,एम पुष्प और फल में प्रकट होते रहते हो. तुम उर्जा हो, जो सुर्यसे लेकर शरीर की नसों में अबाध बहते रहते हो. तुम प्रकृति हो जो समस्त जीवों को उर्जा के रूप में जल फल  देते रहते हो. प्रकृति की उर्जा ही भगवन है.

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