आदमी सीधा था….
मेरे मरने पर, कहोगे आदमी सीधा था,
जैसा भी था थोड़ा ही सही, खरा था.
कहोगे, बहुत नुकसान थोड़ा नफा था,
मानो ना मानो कड़क मुरमुरा था.
कहोगे तुम आदमी, जुबान का कड़वा था
कुछ भी कहो सच्ची बात का महामना था
मेरे चुप रहने पर कहोगे तुम संत था
साधु मन, सही, कमजोर आदमी बड़ा था
मेरे लड़ने पर कहोगे तुम, बिना बात अड़ा था
कमजोर ही सही, लेकिन सही बात पर खड़ा था
भटकती आत्मा था, फटे पैर का साथी था
तबियत अभंग, आदमी बड़ा मस्त मलंग था
प्रेमशंकर वह, दुनिया में इश्क़ का हामी था,
दया धरम को पूजता, सेवाधाम नामी था।
क्यों मन ही मन सदा मुस्काता हूं मैं,
अधीर मन को यूं ही भरमाता हूं मैं,

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