Greed Unlimited

पत्थर से भी मांगते…. भटकते हम,सदा कुछ पाने को.भूखे प्यासे,सदा कुछ भूलने को.कभी ये तो,कुछ वो बहुत, कोमिल जाये,तो भी नहीं रुकने को.संतोष नहीं,ये लालसा अविनाशी है.लगता कभी,क्या हम सब भुतिया हैं.?क्या होना,इसकी अंतहीन दौड़,सोचते सदा,क्या हम डरपोंक भी हैं.?डरते सदा,पत्थर से भी मांगते.पूछा सही,क्या हम वाकई धार्मिक हैं?.किसी भी कीमत,चाहूँ सफलता का हारमन विचारे,क्या … Continue reading Greed Unlimited