मानव मन मलिन….!?

मानव मन मलिन !      !  ! प्रकृति की आत्म कथा. हे मानव….. जो तुम बैठो पास मेरे, हथेली से मेरी घास सहलाओ. और देखो पौधे की पत्तियां, कोई भी एक जैसी कतई नहीं.                    1 देखो तुम कलि पुष्प मेरे, किस उत्साह से फूलते महकते. हवा में लहराते झूमते, निकट है अंत, फिर भी रहते मुस्कुराते               … Continue reading मानव मन मलिन….!?